II गणेश वंदना II
ll वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ll
ll निर्विग्न कुरु मे देव ,सर्व कार्येशु सर्वदा ll
श्री गणेश आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
एक दन्त दयावंत चार भुजा धारी
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी
अन्धन को आँख देत कोढ़िन को काया
बंजत को पुत्र देत निर्धन को माया
हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
लद्दुअन्न का भोग लगे संत करे सेवा
दीनन की लाज राखो ,शम्भू पुत्र वारी
मनोरथ को पूरा करो ,जय बलिहारी
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GYAN KITAB ज्ञान किताब
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